Ganesh Chaturthi Mahotsav गणेश चतुर्थी महोत्सव

Ganesh Chaturthi Mahotsav

Ganesh Chaturthi Mahotsav  गणेश चतुर्थी महोत्सव

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होने वाला गणेश महोत्सव अनंत चतुर्थी तक चलता है।
13 सितंबर से 23 सितंबर 2018 तक चलने वाले इस महोत्सव की धूम चारों ओर देखी जा सकती है।
गणेश प्रतिमा स्थापित कर दस दिवसीय अनुष्ठान का शुभारंभ होता है। |

गणेश अवतरण कथा

भाद्रपद शुक्ल पक्षकी चतुर्थी के दिन श्रीगणेश का जन्म हुआ था।
शिवपुराण अनुसार भगवान गणेशजी के जन्म लेने की कथा का वर्णन प्राप्त होता है,
जिसके अनुसार देवी पार्वती जब स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक का निर्माण करती हैं और उसे अपना द्वारपाल बनाती है।
वह उनसे कहती हैं हे पुत्र तुम द्वार पर पहरा दो मैं भीतर जाकर स्नान कर रही हूं।
अतः जब तक मैं स्नान न कर लें, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर नहीं आने देना।
जब भगवान शिवजी आए तो गणेश ने उन्हें द्वार पर रोक लिया और उन्हें भीतर नहीं जाने दिया।
इससे शिवजी क्रोधित हुए और बालक गणेश का सिर धड़ से अलग कर देते हैं, इससे भगवती दुखी व क्रुद्ध हो उठीं।
अतः उनके दुख को दूर करने के लिए शिवजी के निर्देश

अनुसार उनके गण उत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आते हैं।
और शिव भगवान ने गज के उस मस्तक को बालक के धड़ पर रख उसे पुनर्जीवित कर देते हैं।
पार्वतीजी हर्षातिरेक होकर पुत्र गणेश को हृदय से लगा लेती हैं तथा उन्हें सभी देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद देती है।
ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने उस बालक को सर्वाध्यिक्ष घोषित करके अग्रपूज्य होने का वरदान देते हैं।

गणेश महोत्सव पूजन

श्रीगणेशजी भगवान ऋद्धि-सिद्धि के दाता, विघ्न विनाशक और इच्छाओं को पूर्ण करने वाले हैं, कोई कार्य पूर्ण नहीं हो रहे हो वह भादौ की चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक विधि विधान से पूजन करें तो उसके सभी कार्य सिद्ध होते है।
दूर्वा के बिना पूजा अधूरी होती है। पंचोपचार अथवा घोषणोपचार पूजन के साथ भगवान का विग्रह में आहवन करते है।
गंगा जल, पान, फूल, दूर्वा आदि से पूजन किया जाता है, भगवान गणेश पर सिंदूर चढ़ाने से वह प्रसन्न होते हैं।
भगवान को लड्डुओं का भोग लगाना चाहिए।
नारद पुराण के अनुसार भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर पार्थिव गणेश की स्थापना को बताया गया है।

चंद्र दोष कलंक चतुर्थी

भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी गणेश चतुर्थी के रूप में मनाई जाती है इस दिन भगवान श्रीगणेश चतुर्थी व्रत किए जाने का विधान रहा है।
भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन मिथ्या कलंक देने वाला होता है।
इस दिन चंद्र दर्शन मना होता है।
भगवान श्रीकृष्ण भी इस तिथि पर चंद्र दर्शन करने के पश्चात मिथ्या कलंक के भागी बने।